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थकान

कॉफी हाउस की कुर्सियाँ,
दिन भर खड़े-खड़े थक जाती हैं,
तभी तो,
देर रात को,
टेबल पर,
पलटकर बैठ जाती हैं....

डायलॉग

जब ज़िन्दगी चंद इत्तेफाकों की मोहताज हो जाये तो फिर ज़िन्दगी खुदके अंदाज़ में जीना बेहतर है...(ऐसे ही ख्याल आया...जब कोई फिल्म बनाऊंगा तो उसमें ये डायलॉग ज़रूर रखूँगा.)