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November, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

बात

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चुप हूँ क्यों ये सवाल हुआ है, जो बोल पड़ा तो बड़ा बवाल हुआ है...

Chatting

जब कभी,कहीं मिलती हो,
कहती हो कि मेरी सुनो-अपनी भी कहो, कहने-सुनने के लिये दो लोगों की ज़रूरत पड़ती है, तुम्ही कहो, क्या तुम मुझसे अलग हो???

डर

पूरे दिन बीते मंज़र की कतरन,
जेब से निकालकर रख देता हूँ,
घर की मेज़ पर,
दूसरे दिन फिर बटोरकर,
उन्हें जोड़कर,
आगे की कड़ी ढूंढ़ता हूँ,
कई बार,
मेरे सोते से,
बहुत सारी  कतरन,
रात की हवा उड़ा ले गयी,
तभी से देर रात तक,
जागने की आदत पड़ गयी है...

तन्हा

मोहब्बत वाले दिन भी अजीब होते हैं,
जब याद आते हैं तो,
बिछड़ने की याद ताज़ा कर जाते हैं,
मैं भी कुछ दिनों पहले तन्हा हुआ हूँ...

चाँद की कोशिश

आसमां ने चहरे पर पोत रखी है कालिख, 
और चाँद कोशिश में है उसे साफ़ करने,
सुबह ये कोशिश रंग लायेगी,
जब सूरज फ़लक पर खिल आएगा...

दो पैर वाले का डर

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ओए ! उस दो पैर वाले के पास मत जा,
वो आदमी है!
पहले पुचकारेगा, फिर
लात मारके भगा देगा...

सच, झूठ और शराब

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लोग शराब का नाम खराब करते हैं,
न पीने के पहले सच बोलते हैं, न पीने के बाद,
हम भी शराबी हैं, पीने के बाद हमने भी कभी सच नहीं बोला,
इस जाम की कसम...