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Attiutude

खुदा को मेरी बहुत फ़िक्र है,
खुश करने के बाद,
कर देता है गमज़दा मुझे!

महजबीं

कॉफ़ी टेबल पर, दो दरिया बांधे, अनबुझे काजल को देखा, सुर्ख़ कपड़ों में लिपटे, सफ़ेद कमल को देखा, मेरे लफ़्ज़ों से कहीं ज्यादा खूबसूरत है,
मेरी डायरी के पन्नों से निकली, उस ग़ज़ल को मुझसे बतियाते,
कभी नज़र चुराते और मुस्कुराते देखा...

तिलिस्म

कई मर्तबा आके लौट गया तुझे खिड़की पे देख के,
पहले कभी संगमरमर को मुस्कुराते नहीं देखा था,
ये ताज-महल में किसने जान फूँक दी???

बारिश और तुम

बारिश दबे पाँव आती है, और अपनी मौजूदगी के निशां, खिड़की पर छोड़ जाती है, जो कुछ देर बाद, खुद-बा-खुद गायब भी हो जाते हैं, पर तुम तो मेरी ज़िन्दगी में, अब भी नुक्ते की तरह समाई हो.