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मुश्किल

मेरी पहचान बन गयी है मेरे सपनों के लिए मुसीबत का सबब,
फिर नई पहचान बनाने के लिए कुछ मुझे दिन गुमनाम होना पड़ेगा!

मेरा वक्त

वो वक्त भी नज़दीक आता दिख रहा है,
जब लोग रस्ता देखेंगे मेरे आने का...

ज़िक्र

ज़िक्र तेरा जब किसी दर पे सर-ए-सुबह उठा है,
निकलते-निकलते वहाँ से शाम हुई है..

छोटा सा किस्सा

दौर-ए-कुल्फ़त* में किसी से उल्फ़त क्या तकी जाए..
सर्द मौसम है और रात भी गाढी है,
बेहतर है मुँह ढंके और सोया जाए...


कुल्फ़त-आफत/मुश्किल
उल्फ़त - प्यार/मोहब्बत

असर

मेरे चाहने वालों की तादाद दिन-ब-दिन बढ़ रही है,
मुझसे नफ़रत करने वालों, अपनी दुआओं में थोड़ा और असर पैदा करो.

सिगार

जब हाथ में आखिरी सिगार सुलग रहा होता है,
तो मन कहता है कि काश ये थोड़ी देर और सुलगता,
जब तपिश उँगलियों तक पहुँचती है,
तो दिल कहता है कि काश ये आखिरी छोर तक जलता,
पर सिगार को भी पता होता है कि उसे अब बुझना है,
ये ज़िन्दगी भी इसी तरह सुलग रही है,
और कब ये छोर तक आ पहुंचेगी,
पता भी नहीं चलेगा,
इसलिए...हर कश का पूरा मज़ा लो,

तेवर

आज पूरी दुनिया से कर सकता हूँ मैं दुश्मनी,
फिलहाल कोई दोस्ती का हाथ आज मेरी तरफ मत बढ़ाना!

हँसना-रोना

अफवाहें!

अफवाहों को बाज़ार गर्म है,
तुम अपना दामन बचा कर चलना,
कहीं ज्यादा तपिश से आग न पकड़ ले!

वो रात!

उसकी सोती हुयी साँसों में भी सरगम सुनायी देती है,
खुदा ने वक्त निकालके गढ़ी हो वो रुबायी लगती है,
पूरी रात मैं उसे ताकते रहा और सुबह हो गयी,
ये बात पूरी तरह सच है पर एकदम करिश्माई लगती है ...

ख्याली दुनिया

जब मैं सोने जाता हूँ अपने अँधेरे कमरे में,
मोबाइल में रेड Key दबाकर देखता हूँ वक्त,
और उससे होने वाली मद्धम रोशनी में,
कुछ ख्याल से चले आते हैं बेवक्त,
जो ठीक से नज़र भी नहीं आते,
और नींद के झोंके छिटककर गिर जाते हैं दूर,
फिर सोचता हूँ कि सुबह उठा लूँगा मैं उनको,
पर तब तक वो गायब हो जाते हैं,
ऐसे, जैसे थे ही नहीं कभी,
या कोई ख्यालों का चोर उठा ले गया उन्हें,
और बेच दिया हो किसी ऐसे बाज़ार में,
जहाँ से कोई मालगाड़ी उन्हें भरकर,
निकल पड़ती है किसी ऐसी दुनिया में,
जहाँ हर ख्याल हकी़कत हो जाता है,
जे.के.रॉलिंग के जादुई उपन्यास की तरह,
इसी वजह से पिछले कई दिनों के ख्यालों को,
सहेज नहीं पाया मैं अपनी डायरी में,
अगर मेरा कोई ख्याल तुम्हें दिखाई दे,
तो उसे कान से पकड़कर रख लेना अपने पास,
मैं लौटते हुए, उसे अपने घर लेता आऊंगा!

Smiley

क्यों वो नज़र मेरी हर इक हरकत पे रखती है..
क्या ये सही है कि वो मुझपे नज़र रखती है!

ग़लतफ़हमी

तुम्हारी दुनिया की रौनक भी मैं,
तुम्हारी साँसों की खलिश भी मैं,
ज़रा सोचकर देखो,
मेरे बगैर तुम्हारी दुनिया कितनी सूनी है!