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March, 2012 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

तेरा इंतज़ार

तेरे इंतज़ार में पूरी शाम काटी है मैंने कुछ यूँ,
जैसे अगली साँस के इंतज़ार में दिल की अगली धड़कन,
जैसे ऊपर की पलकों से मिलने को बेताब निचली पलक,
जैसे स्कूल से छूटकर माँ से मिलने को बेताब बचपन,
काश, कि तुम भी कुछ इस तरह ही बेचैन होते,
काश, कि तुम जो कुछ भी होते,
मेरे लिए होते..



अधूरा ख़्वाब

अधूरी नींद है, अल-सुबह किसी ख़्वाब ने जगा दिया,
जो खुद भी अधूरा ही रह गया,
वैसे हर ख़्वाब अगर पूरा होने लगे,
तो हक़ीक़त और उनमें, क्या फर्क रहेगा???

चाय बार

दुनिया इधर की उधर हो जाये लेकिन,
तुम जान-ए-मन,
जैसी की तैसी मिलती हो,
चाय बार में,
काँच के प्याले में..
और एक-दो चुस्कियों में,
जुबां को मीठा कर जाती हो,
वैसे बहुत कड़वाहट भर दी है,
इस दुनिया ने मेरे दिल में,
क्या दिल के लिए भी,
कोई चाय आती है?