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मन

पौधे जैसा ही है ये कि कहीं लगा भी दो,
तो तब तक नहीं लगता, जब तक इसे खुशहाल मिट्टी,  वाजिब नमी और ज़रूरतमंद रोशनी न मिले, गर कहीं लग गया, तो फिर इसे हटाना भी मुश्किल है, कई बार, ज़ोर-ज़बर्दस्ती से हटा भी दो, तो इसका दुबारा पनपना, मुश्किल होता है, वैसे,
दुनिया में अनगिनत लोग, बेमन तरीके से लगे हैं, अपने - अपने कामों में, क्योंकि कभी - कभी, रोज़ी - रोटी के लिए, मन मार के भी काम करना पड़ता है, चलता हूँ...
मेरा भी कुछ काम बाकी पड़ा है.

हैप्पी न्यू इयर २०१३

मन तो करता है कि,
अपने अल्फ़ाज़ों को,
शहद में भिगोकर,
उस पर मिश्री के दाने छिड़ककर,
कागज़ पर लिख दूं,
साल २०१३ की आप सबको शुभकामनायें,
फिर लगता है कि,
ज़्यादा मीठा चखने से,
काग़ज़ के दांत खराब हो गए,
तो इसकी ज़िम्मेदारी आप लेंगे???
इसलिए,
सादी शुभकामनायें लिख रहा हूँ,
२०१३ के लिए...