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वॉइस मेसेज

अपने ख़त की तरह
कभी अपनी आवाज़ भी
लिफ़ाफ़े में रखके भेजो!
मुझे लगता है
कि लिखावट की तरह
तुम्हारी आवाज़ भी
बेहद ख़ूबसूरत होगी
जिसमें तमाम नुक़ते
तारों जैसे हसीन लगते होंगे...

खैर-ख़बर पूछने वाले लोग

ख़ुदा ने आपके जैसे भी लोग बनाये हैं,
थोड़े बनायें हैं पर क्या ख़ूब बनायें हैं.

खैर-ख़बर

कितने लोग हैं ज़िन्दगी में,
पर खैर-ख़बर तुम ही पूछते हो,
पता नहीं
वाकई पूछते हो
या यूँ ही पूछते हो!!

इंतज़ार

बड़ी देर से बैठा है सूरज तेरी बालकनी में टकटकी लगाए,
कि कब तू नींद से जागे और आँखें मलते हुए धूप से टकरा जाए..

बहरूपिया

तेरी इक झलक पाने को छत से खिड़की तक आता है,
ये सूरज है जो कभी-कभी चाँद की शक्ल में आता है...

उसका आई लव यू

कुछ लफ्ज़ वो ऐसे कहती है,
कोई जादू जैसे  फूँकता हो,
फिर चेहरे पर हँसी यूँ आती है,
जैसे कहकहा कहीं गूंजा हो...