शनिवार, 24 मई 2014

मैंने तुमसे कह तो दिया

मैंने तुमसे कह तो दिया कि तुम पर मैंने कुछ लिखा है...
और तुम भी खामाख्वाह में जज़्बाती होकर
पूछने लगीं कि लिखा क्या है?
हालाँकि, वो मैंने तुम्हें यूँ ही नहीं कहा था
क्योंकि मैंने कल रात तुम्हें आईने में रखकर
लफ़्ज़ों को बुना था,
पर आज जब मैं तुमसे दुबारा मिला
तो लगा कि कुछ कमी रह गयी थी उनमें
इसलिए अभी उन लफ़्ज़ों की सिलाई उधेड़कर
दुबारा कुछ बुनने बैठा हूँ
और अब सोच रहा हूँ
कि शुरू कहाँ से करूँ?
तुम्हारा मुझे पुकारने के अंदाज़ से?
जिसमें मैं साउथ का कोई हीरो होता हूँ..
या फिर चाय पीने की उस अदा पे
जब तुम प्याले को बड़े इत्मीनान से होंठो से लगाती हो?
या तुम्हारी आँखों से
जिन्हें तुम कभी-कभी
दोनों तरफ से काजल की कैद में समेट देती हो ???
ह्म्म्म...आज रहने देता हूँ...
फिर कभी फुरसत में बैठूँगा सोचूँगा..
ठीक उसी तरह जैसे
तुम्हें बनाने के लिये खुदा ने भी सोचा होगा,
वक्त निकाला वक्त निकला होगा....
लेकिन
मैंने तुमसे कह तो दिया है कि

तुम पर मैंने कुछ लिखा है...

अधूरा वादा

धूप में कुछ चीज़ें तपते-तपते सख्त हो जाती हैं
कुछ नर्म तो कुछ फीकी पड़ जाती हैं,
मई के इस महीने में
छत पर सूखती कैरी मटमैली पड़ गयी हैं
अब ये साल भर तरी में खट्टापन देती रहेंगी
वैसे जून का एक अधूरा वादा भी
पिछले साल से पड़ा-पड़ा तप रहा है,
हमारे रिश्ते में ये अधूरा वादा
कुछ खटास लेकर ज़रूर आयेगा
चलो अच्छा है!
बरसों के बेमज़ा इस रिश्ते में
कोई स्वाद तो आयेगा...

गुरुवार, 22 मई 2014

बरसों पुराना रिश्ता

उन दोनों के बीच
प्यार का रिश्ता,
आज भी इतना ताज़ा है
कि,
इक-दूजे का हाथ
ग़लती से भी
इक-दूजे को छू जाए तो
ग़लती का अहसास हो जाता है
कि,
इक-दूजे का हाथ
पकड़ने से पहले
अब भी
इक-दूजे से
पूछ लिया जाता है,
उन दोनों के बीच
बरसों पुराना ये रिश्ता
अब भी इतना ताज़ा है
जिसके सामने ओस की बातें भी फीकी
और कली-कोपलों की मिसालें भी छोटी हैं,
उन दोनों में "वो" कहती है कि
"एक अच्छे रिश्ते की यही पहचान है"

उन दोनों के बीच
प्यार का रिश्ता,
आज भी इतना ताज़ा है...

मंगलवार, 13 मई 2014

जैसे को तैसा

ज़िंदगी जब तुम्हारे मज़े लेने लगे,
तो शिक़ायत मत किया करो,
अमां यार, जब तुमने उसके लिये थे मज़े,
तब उसने कुछ कहा था क्या ???