संदेश

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गर्भ

सब उम्मीद से हैं
जैसे तुम
वैसे मैं भी
और ये उम्मीद
प्रसव पीड़ा तक
यानि
मृत्यु पर्यन्त रहेगी।

धोख़ेबाज़ी

बातें बनावटी हों तो भी पकड़ आ जाती हैं
फिर चेहरों से इंसान धोख़ा क्यूँ खा जाता है?

काजल

उसकी बड़ी-बड़ी आँखों पर काजल की हदों ने
न जाने कितने दिलों को बाँट दिया होगा
कोई हिस्सा कह रहा होगा आफरीन-आफरीन
और कोई चश्म-ए-बद्दूर की दुआ पढ़ रहा होगा।

डिजिटल इण्डिया

कृषि प्रधान देश को डिजिटल बना दीजिये साहब
फिर हम सब खेतों में डेटा उगायेंगे
जो किसान क़र्ज़ के तले दबा हुआ है
वो PAYTM से अपना सूद चुका देगा
और असल Internet Banking से!
कुछ और कम्पनी आयेंगी विदेश से
और खेतों की ज़मीन को पचा जायेंगी
किसान मुआवज़े के लिए भटकेगा दर-दर
फिर उसकी DP पर आ जाएगा RIP!

Perplexity

वो आये भी और चले भी गये
राहत की इक साँस की तरह
और मैं इस सोच में डूबा रहा कि
सपना था एक और तुम्हारा...

तो फिर एक बार में निकल सकता है FTII Entrance Exam

23 अगस्त 2015 को FTII का Film Direction and Screenplay writing (3 year) के लिए Entrace Exam देने के बाद मैं इस बारे में नोट्स बना रहा था कि जो लोग इस परीक्षा में उत्तीर्ण होना चाहते हैं उन्हें क्या करना चाहिए? इस सिलसिले में कुछ महत्तवपूर्ण बिंदु जो मुझे समझ आये हैं मैं उनका ज़िक्र करता हूँ, जहाँ तक मेरी समझ है यदि इन पर अमल किया जाए तो बहुत हद तक पहली कोशिश में आप इस परिक्षा को उत्तीर्ण कर सकते हैं.लेखन क्षमता और गति – तीन घंटे के पेपर में लिखने के लिए बहुत कुछ होता है लेकिन अभ्यास न होने की वजह से पेपर पूरा न लिख पाना आपको बाद में भारी पड़ सकता है. इसलिए बेहतर है कि परीक्षा के तीन से चार माह पूर्व प्रतिदिन एक पृष्ठ शुद्ध लेख लिखें. आप चाहें तो उस शुद्ध लेख में कोई ऐसी जानकारी लिखें जो आपकी परिक्षा के समय में आपके लिए महत्तवपूर्ण साबित हो. आज, अभी और इसी समय – आपके विषय से सम्बंधित कोई लेख या जानकारी मिलने पर उसे बाद में पढने के लिए न छोडें. उसे तुरंत पढ़कर सुरक्षित रखने से पहले उसका एक फोटो अपने मोबाइल से ज़रूर ले लें. आपने जो भी पढ़ा है उसके विषय में बातों ही बातों में किसी से उस जानकार…

15 अगस्त, रॉबिन हुड और राम

चित्र
आज 15 अगस्त को मैं अपने ही गाँव के स्कूल में था, मैंने वहाँ बच्चों से ये नहीं पूछा कि आज के दिन झन्डा क्यूँ फहराते हैं? और न ही उनसे देश के प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति का नाम पूछा। मैंने ऐसा इसलिए नहीं किया क्यूँकि बहुत सारे लोग इस तरह के सवाल बच्चों से पूछते हैं और सही जवाब न मिलने पर कहते हैं कि जिन बच्चों को स्वतंत्रता दिवस के मायने नहीं पता वो आगे चलकर हमारे देश का भविष्य कैसे बनेंगे? इसलिए मुझे लगता है कि उन बच्चों पर लानत लादने से पहले हमें अपनी बुज़ुर्ग पीढ़ी से पूछना चाहिए कि हमें इस आज़ादी का क्या मतलब निकालना चाहिए? क्योंकि अगर आप किसी लड़के या लड़की के साथ पार्क में बैठे हैं तो आपसे पहले आपके घर आपकी ख़बर पहुँच जायेगी फिर परिवार वाले आपकी ख़बर लेंगे। हमारे देश के ज़्यादातर हिस्सों में आपसे ऐसी "हरकत" करने पर कोई सफ़ाई नहीं माँगी जाती, बस सीधे धुलाई की जाती है। बुजुर्गों के मुताबिक़ एक लड़की और लड़के का सड़क पर हाथ में हाथ डाल कर घूमना-चूमना अश्लील है बजाए किसी को मारने-पीटने, मूत्र विसर्जन करने, तोड़-फोड़ करने और धूम्रपान करने के। वो ये भी चाहते हैं कि स्कूल में पढ़ाई के नाम पर स…

जबलपुर

एक पुराना मकान
इक्का-दुक्का दोस्त
सुनसान पड़ोस
थोड़ा रसूख़
और बहुत सारा
यहाँ-वहाँ बिखरा हुआ ग़म
अपने शहर के नाम पर
बस यही कुछ बाकी है।

सलमान भी अपराधी बन गए तो..

एक बात जो कल अपने मित्र के साथ चर्चा करने पर सामने आयी वो ये कि आप अपराधियों को "जेल" यानी "बंदी सुधार गृह क्यूँ भेजते हैं?" ज़ाहिर सी बात है कि उस अपराधी को सुधरने का मौक़ा देने और साथ ही उसे दण्ड देने के लिये। क्या सलमान खान में अब भी अपराधी प्रवृत्ति है? क्या वो उस हादसे के बाद भी शराब पीकर गाड़ी ड्राइव करते हैं? क्या सलमान के व्यवहार में सुधार की आवश्यकता है? आपके मन में शायद ये सवाल आ रहा हो कि ठीक है उनमें अपराधी प्रवृत्ति नहीं है, तो क्या उन्हें सज़ा नहीं होनी चाहिये? तो मेरा मत है बेशक़ होनी चाहिये लेकिन आप ये बताईये कि जेल में पहले से वो लोग मौजूद हैं जिनमें सुधार की आवश्यकता है। ऐसे लोग जो ह्त्या, लूटपाट, डकैती और बलात्कार के जुर्म में दण्ड भुगत रहे हैं। ऐसे में एक सामान्य और अच्छी सोच के व्यक्ति के मनोविज्ञान पर क्या प्रभाव पड़ेगा? उसके साथ बाक़ी अपराधी किस तरह से पेश आयेंगे? पाँच साल में सोच ही नहीं पूरा व्यक्ति बदल जाता है। विद्वान कहते हैं कि अच्छाई जब बुराई के घर जाती है तो संक्रमित होकर लौटती है। कहीं सलमान भी अपराधी बनकर लौटे तो ये इंसानियत की हार होगी। द…