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जबलपुर

एक पुराना मकान
इक्का-दुक्का दोस्त
सुनसान पड़ोस
थोड़ा रसूख़
और बहुत सारा
यहाँ-वहाँ बिखरा हुआ ग़म
अपने शहर के नाम पर
बस यही कुछ बाकी है।