संदेश

December, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

गर्भ

सब उम्मीद से हैं
जैसे तुम
वैसे मैं भी
और ये उम्मीद
प्रसव पीड़ा तक
यानि
मृत्यु पर्यन्त रहेगी।

धोख़ेबाज़ी

बातें बनावटी हों तो भी पकड़ आ जाती हैं
फिर चेहरों से इंसान धोख़ा क्यूँ खा जाता है?