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कीमती वक़्त

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तुम्हारी घड़ी तो बहुत महँगी है
फिर भी तुम्हारे पास मेरे लिए
वक़्त नहीं है!


सच

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जो दिल में है गर वो ज़ुबाँ तक आ जाएगा
सुनने वालों का कलेजा मुँह तक आ जाएगा

यूँ ही जो दम भरते हैं अपनी दरियादिली का
वो दरिया छलक कर गलियों तक आ जाएगा

जिनकी सियासी चालों से रियासत में है हलचल
पत्थर उछलकर उनकी खिड़की तक आ जाएगा

जिसने लगाई है जंगल में ख़बर आग की तरह
वो धुआँ उड़कर उसके शहर तक आ जाएगा

सुना है कि कलयुग में भी आएगा कोई अवतार
लगता नहीं कि क़यामत से पहले तक आ जाएगा

साहिबा

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तमाम उम्र की दोस्ती लेके वादे में
तन्हाईयों से राबता मेरा करा गया
जो शख्स़ दिखता था चाँद में पहले
जाने गुम कहाँ बादलों में हो गया।

नाम-बदनाम

एक मैं ही नासमझ निकला दयार-ए-यार में,
कम से कम बाज़ार में इसकी तो दाद मिले।