शनिवार, 28 मई 2016

कॉन्डम

बहुत बदनाम हूँ
उस गली के गुंडे से भी ज़्यादा
जो आती-जाती हर लड़की को
अपने साथ सुलाना चाहता है
उस करप्ट लीडर से भी ज़्यादा
जिसने ग़रीबों का राशन खाया है
लेकिन इतना बदनाम होने के बाद भी
जो बात मुझमें अच्छी है वो ये कि
कि खड़े पे सिर्फ मैं काम आता हूँ
फिर भी समझ नहीं आता
कि लोग दबी ज़ुबान में ही
मेरा नाम क्यूँ  लेते हैं..
इतना ख़राब भी नहीं है
जिसने भी रखा है मेरा नाम
कॉन्डम..



क्या हुआ शर्मा गए..??

बुधवार, 4 मई 2016

शेष

हर बार जाता हूँ जब
तो छूट सा जाता हूँ कहीं
जैसे ट्रेन जाने के बाद
छूट जाते संगी-साथी प्लेटफ़ॉर्म में
और मेरी आँखों में रह जाती है
उनकी सूरत
कानों में उनकी खिलखिलाहट
ऐसा कुछ उनकी आँखों में भी
मेरा कुछ छूट तो जाता होगा।