मंगलवार, 28 जून 2016

घिसा-पिटा सब्जेक्ट

बारिश...
बहुत घिसा-पिटा सबजेक्ट है
लिखने के लिए
एक लड़की भीगी-भागी से लेकर
सावन आया-आया है तक
हिन्दी फिल्मों के पच्चीस गाने
पर्दे पर बारिश करके जा चुके हैं
इसलिए खाली वक़्त में जब बारिश
ख़ुदको गूगल करती होगी
तब बेशक़ थोड़ा इतराती होगी
जैसे मेरी कुछ दोस्त
मेरी नज़्मों को
ख़ुद से इंस्पायर्ड बताकर इतराती हैं
और थोड़ा बुरा भी लगता होगा उसे
न्यूज़ सेक्शन पढ़कर
जब देखती होगी
कि सूखा पीड़ित किसान को
मुआवज़ा मिला सिर्फ़ चालीस पैसा!
फिर कभी पछताती भी होगी
जब पता चलता होगा कि
बाढ़ में कैसे बह गया पूरा शहर
चीन वालों पे तो अच्छा-ख़ासा गुस्सा आता होगा
जब पढ़ती होगी कैसे
बारिश को ओलम्पिक खेलने से रोका था
और अपनी हमशक़्ल
आर्टीफीशियल रेन के बारे में पढ़कर तो
पेट पकड़-पकड़के हँसती होगी
हालाँकि तस्वीरों वाले सेक्शन में जब उसे
ख़ुदके प्रोस एंड कॉन्स दिखते होंगे
तब ज़रूर मिक्स फ़ीलिंग से भर जाती होगी
बस एक बात के बारे में पता नहीं है
कि अपने बारे में इतना कुछ पढ़कर
उसे ऊब होती होगी या अच्छा लगता होगा?
ख़ैर जो भी हो
पर आपको नहीं लगता
कि बारिश बहुत घिसा-पिटा सबजेक्ट है
लिखने के लिए!

रविवार, 26 जून 2016

Over Confidence

ख़ोखला हो भी जाऊँ
तो भी राख होने तक
उड़ता रहूँगा आसमाँ में
सुना है हौसला
इन्साँ को सम्भाले रखता है

रविवार, 19 जून 2016

शीर्षक अंत में है

धूप के भी क्या तेवर हैं
कभी बहुत तीखे
कभी नरम
तो कभी कुनकुने
कभी-कभी तो लगता है
कि ये धूप न होती
तो इत्मीनान से दिन-दोपहर
कहीं भी घूम-फिर लेते
पर साइंस कहता है कि
धूप तो लाइफ़ का विटामिन D है
उसके बिना तो मज़बूती से
खड़े हो पाना भी मुश्किल है
हालाँकि धूप का तुमसे कोई स्वार्थ नहीं है
रत्ती भर का भी नहीं
फिर भी धूप
ज़रूरी और गैर-ज़रूरी वक़्त पर
साथ होती है
और जब नहीं होती है
तो उसकी कमी महसूस होती है
पिता के तेवर भी धूप जैसे ही हैं
जो कितना कुछ देता है हमें
लेकिन उसका स्वार्थ बस इतना है
कि उसे तुम्हारी ज़िन्दगी
छाँव से भरी चाहिए...

धूप के भी क्या तेवर हैं..हैं न?


#SaluteToAllFathers
#HappyFathersDay


"पिता"

रविवार, 12 जून 2016

Dear Madam

Dear Madam,

मैं आज भी आपकी तस्वीर देखकर हँस देता हूँ
ये सोचकर कि उस वक़्त
जब इश्क़ जैसी राहत
मेरी समझ से बाहर थी
न जाने आपको देखकर
कैसे इक बार में ही समझ आ गई
मैंने कभी आपसे कुछ भी नहीं कहा था
और आपको भी मेरी सारी बातें
न जाने कैसे समझ आ गईं
फिर भी ये समझ किसी काम न आई
क्योंकि हम दोनों ही
दुनिया की समझ से बाहर जो हो गए थे...
ख़ैर, जो भी हुआ
उसमें हमने
हम दोनों के अलावा भी
बहुत कुछ खो दिया था
जैसे मैंने आपका भरोसा
और आपने अपनापन
मुझे नहीं पता कि ज़िन्दगी में
बहुत कुछ हासिल कर भी लिया तो
क्या दुबारा ये हासिल कर पाउँगा
जो कुछ थोड़ा सा
पहले कभी खो दिया है?

आपको क्या लगता है
बताना ज़रूर

Yours
Stupid Student

P.S. सर से कहना कि मेरे टेस्ट पर सवाल न उठाएँ.. मैं तब भी बच्चा नहीं था और अब भी नहीं हूँ।