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मिलना

सिर्फ़ आमने-सामने बैठने को
और बैठकर बात करने को
मिलना नहीं कहते
मिलने के लिए बहुत ज़रूरी है
आत्मसमर्पण कर देना
जैसा अपराधी करते हैं
सारे हथियार डालकर
निहत्थे हो जाना
बिल्कुल वैसा
अपने एक-एक गुनाह को
कबूल करना
जो हमने कभी किये थे
अपने
हाथों
आँखों
और विचारों से।


जाते-जाते

उसने पूछा - सीधे घर जाओगे?
मैंने कहा - मेरे घर के रास्ते पे पहले मयकदा पड़ता है, फिर बुतख़ाना, फिर दोस्त का घर, फिर अहाता और फिर मेरा घर।
वो हँसते हुए चली गयी और मैं अब तक घर नहीं पहुँच पाया।

लघु कथा - Offline

लगभग तीन दिन हुए थे, सबकुछ ठीक चल रहा था। सबकुछ से मेरा तात्पर्य है कि उसका मुझे देखना, मेरा उसे देखना और दोनों का एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराना। एक सामान्य व्यक्ति के लिये सबकुछ की परिभाषा लगभग यही होती है। इसके बाद थोड़ी बातचीत भी शुरू हो गयी। फिर तीसरा दिन ख़त्म होते-होते उसने संकोच करते हुए व्हाट्स एप पर पूछ लिया कि आपकी उम्र कितनी है? मैंने प्रॉपर डेट ऑफ़ बर्थ के साथ उसे जवाब भेज दिया। तब से वो ऑफलाइन है।