तुम चाहो या न चाहो

जब तक मैं इस धरती पर हूँ
तुम चाहो या न चाहो
माँगो या न माँगो
मैं फिर भी
अपने ज़िंदा होने के सबूत
तुम्हें देता रहूँगा
कभी अन्याय के ख़िलाफ़ लड़कर
कभी किसी का झूठ झूठ साबित कर
कभी किसी से प्रेम कर
कभी किसी की आवाज़ बनकर
कभी हवा के विपरीत चलकर
कभी सूर्य से पहले उठकर
कभी रात भर जागकर
कभी कविता लिखकर
कभी कोई गीत गाकर
कभी नदी पारकर
कभी पहाड़ चढ़कर
कभी सबके लिए जीकर
कभी सबके लिए मरकर

तुम चाहो या न चाहो
माँगो या न माँगो
मैं फिर भी
अपने ज़िंदा होने के सबूत
तुम्हें देता रहूँगा

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