रविवार, 18 जून 2017

पिता

पिता यूनिवर्स की तरह है
उसके भीतर की गहराई नापना
मुमकिन ही नहीं है
यूनिवर्स की तरह ही
वो अपने दामन में
सूरज की गर्मी, यूरेनस की सर्दी
जूपीटर के तूफ़ान और जाने कितने राज़
दबाए रखता है
पिता के रहते
सब अपनी-अपनी धुरी पर घूमते हैं
अपनी कक्षा में ही चक्कर लगाते हैं
कोई किसी से नहीं टकराता
और बिग-बैंग थ्योरी की तरह
पिता की पनाह में
सबका विस्तार जारी रहता है
भले ही रिलेटिविटी की थ्योरी
जनरेशन में टाइम डिफरेंस पैदा कर देती हो
लेकिन तमाम असमानताओं के बावजूद
पिता सबका बराबरी से ख़याल रखता है
क्योंकि उसकी नज़र में
सब उसकी ही ज़िम्मेदारी हैं.
पिता यूनिवर्स की तरह है...