खुद का स्केच

मुझे ऐसा लगता है कि ये सबसे मुश्किल काम है, अपने बारे में कुछ बोलना या लिखना, फिर भी कोशिश करता  हूँ कि अपने आप को बयां कर पाऊं…


वैसे मेरा नाम चक्रेश सूर्या है और कुछ नाम और भी हैं मेरे. जैसे..बंटू, सूफ़ी, चक्कू, सूर्या, आदि...मेरे हर नाम के  पीछे कोई न कोई कहानी है. आपको जो नाम पसंद आये आप उसकी कहानी के बारे में पूछ लेना. खैर, अपने व्यक्तित्तव के बारे में जानने की कोशिश की तो पता चला कि मैं “mysterious” personality को belong करता हूँ. हो  सकता है कई बार आप मुझे बहुत सुलझा पायेंगे और कई बार मैं खुद से ही बहुत उलझा हुआ रहता हूँ.


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कई बार ऐसा होता है कि cellphone पर मैं किसी से बात कर रहा होता हूँ और रास्ते में कोई अनजान मिल जाये तो अक्सर दूसरी तरफ वाले से कहते हुए सुना …आप उसे कब से जानते हैं जो आपको अभी मिला? क्योंकि आपके लहज़े से लगा नहीं कि वो कोई अनजान है...
Hmmm…मुझे भी ऐसा लगता है कि मैं लोगों से बहुत जल्दी घुल-मिल जाता हूँ.. इसलिए तो लगता है कि “Mysterious” personality वाला बंदा और लोगों से मिलनसार..दोनों बातें विपरीत सी लगती हैं पर दोनों ही सच हैं…

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ब्लॉग इसलिए लिखता हूँ क्योंकि लिखने से प्रसन्नता मिलती है मुझे, अच्छा लिखता हूँ या बुरा ये तो आप जानो.


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मेरे एक मित्र हैं रांची के रहने वाले, जिन्होंने अपनी पत्रकारिता की पढाई Delhi से की लेकिन तमाम काम करने के अवसर छोड़ कर समाज सेवा में लगे हुए हैं. उन्होंने मेरी ब्लॉग पढ़कर मेरी लेखनी की प्रशंशा की और कहा कि मैं अपने मित्रों को तुम्हारी ब्लॉग पढ़वाऊंगा और फिर उन्होंने कहा कि तुम्हारी ब्लॉग पढने वाले तुमसे बात करना  चाहते हैं, तुमसे बिना पूछे तुम्हारा नंबर नहीं दूंगा किसी को..बेहतर होगा कि मैं तुम्हारा visiting card बनूँ उससे पहले तुम अपनी ब्लॉग में अपना cell number डाल दो. कई दिन सोचने के बाद आज मैं अपना cell number यहाँ दे रहा हूँ, अगर आपका बात करने का मन करे तो बेहिचक call करें, लेकिन अपना नाम ज़रूर बताएं वरना अक्सर  लोग पहली बार call करके ही कहने लगते हैं ..पहचान  कौन???



कहते हैं कि हर काम के पीछे कोई न कोई प्रेरणा होती है, मेरे ब्लॉग लिखने के पीछे भी ऐसा ही कुछ ...मेरा एक अभिन्न मित्र  “विकास परिहार ” जो अब इस दुनिया में नहीं है, जिसने मुझसे ब्लॉग लिखने को कहा…इसके बाद मेरे जीवन की उथल-पुथल भी मेरे लिये प्रेरणा का काम करती गयीं. कभी कुछ अच्छा होता तो ब्लॉग पर लिख देता और कभी कुछ बुरा होता तो वो भी लिख देता..


बिखरे  हुए बाल, बढ़ी हुई दाढ़ी,
माथे को जकड़े सच्चे-झूठे ख्याल,
हर जगह खुद को तलाश करती आँखें,
मुश्किलों को पस्त करती तनी हुई मूंछें,
बात- बेबात फूट पड़ती खामोश सी हँसी,
और होंठों के पीछे अनकहे, अधूरे किस्से...
फिलहाल के लिए तो यही मैं हूँ।

ऐसा लगता है ये मेरी ब्लॉग नहीं है, कोई जीवंत चरित्र है जो मुझसे जुडा हुआ है.
Cell Number : +91-9329504069


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